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ज्मी और शूजित सरकार तक शाहरुख आमिर सलमान इन तीनों खानों से घिरे बॉलीवुड में इरफान खान अपने आप में प्रतिभा दिखाने आंखों से अभिनय करने की उनकी अदा हो संवाद बोलने की अपनी सहजता रोमांटिक रोल से लेकर बीहड़ का डाकू बनने की उनकी क्षमता ताजमहल कम ही देखने को मिलता है जिस तरह से वह मासूमियत भोलेपन दर्द तिरस्कार और बगावत को एक साथ अपने चेहरे पर लेकर आते हैं जब सिर्फ पान सिंह बोलता है बाकी होते हैं डकैत मिलते हैं पारले मिनट में करने वाली थाली सिर्फ संवाद पर नहीं थी इरफान खान हमें यह भरोसा दिलाते हैं कि भले ही आप जानते हो कि यह सही नहीं है 2012 में आई इस फिल्म के लिए इरफान खान को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था या फिर हैदर में कश्मीर में रुहदार का रोल देनी चाहिए झेलम बीमा चिनार धीमे अभी मैं सुननी भी में और पंडित भी रफ्तार का किरदार जो कहने को एक भूत था को विश्वास दिलाता है कि वह असल में है और आपकी ही समीर की आवाज है कपिल मकबूल में अब्बा जी के लिए वफादारी और निम्मी के बीच फंसा मियां मकबूल यानी इरफान जो अब्बा जी का कत्ल कर उससे तो पीछा छुड़ा लेता है लेकिन उस लानी उसका पीछा नहीं छोड़ती हाथों पर भी बिना कुछ कहे इरफान आत्मग्लानि का वह भाग हम तक खामोशी से बचाते हैं ऐश्वर्या राय से कहते हैं मोहब्बत है इसीलिए तो जाने दिया तो बाहों में होती कि सुनकर आपको यकीन हो जाता है कि इससे दिल का कितने का मतलब है कि इरफान खान की खासियत यह थी पर्दे पर करते थे सिनेमा में बैठी जनता कुल्ला इस किरदार को कोई कर ही नहीं सकता था सच्चाई जहां टाइप का हो जाना कर दिया जाना एक नियम सा है इरफान उन सारे नियमों को तोड़ दे रहे जब तक तो हिंदी मीडियम जैसे रोल से उन्होंने बार-बार दिखाया कि कॉमिक टाइमिंग में उनका कोई जवाब नहीं अगर आपने करीब करीब सिंगल या फिर कूदे ख्याल आता है कि इंसान असल जिंदगी में चौथे भी और खुलेआम कहा भी करते थे साजन तने ने शायद उनका निभाया सबसे प्यारा किरदार होगा एक लंच बॉक्स और दो लोगों की प्रेम कहानी जो कभी एक दूसरे से नहीं मिले इरफान ने साजन फर्नांडिस को जिस्म एक्टिंग की मास्टरक्लास ही कही जा सकती है कान फिल्म फेस्टिवल लेकिन कामयाबी के इस चमक के पीछे संघर्ष और टेलीविजन पर छोटे-मोटे रोल करने का संघर्ष रहा है दूसरे लोगों की तरह n.s.t. में पढ़ाई के बाद उन्होंने मुंबई का रुख किया छोटे-मोटे रोल के अलावा उन्हें कुछ नहीं मिला डॉक्टर की मौत जैसी फिल्मों में वह पंकज कपूर के साथ साथ ही टेलीविजन भी करने लगी रात हो कहकशा लाल घाट पे नीलेश बनेगी अपनी बात जैसे सीरियलों में टीवी के पर्दे पर नोटिस किया चंद्रकांता में बद्रीनाथ के रोल से उनके को पहचानने का काम अंग्रेजी फिल्म का राशिद कपाड़िया ने किया 2001 में आई फिल्म वॉरियर्स से जो बाफ्टा तक गई खान खान ने अपने कर फिल्म खराब कहा जा सकता हूं एक बार उनसे इंटरव्यू का मौका मिला था तब उन्होंने कहा था कि एक इंसान सही गलत के प्रयोग से गुजरेगा नहीं तो समझेगा कैसे कोई बहुत बड़ा नहीं था पर उन्होंने मुझे बताया था कि कभी-कभी कोई रोल इस लिए भी करते हैं क्योंकि आपको पता है कि आपको बहुत कुछ सीख लाकर जाएगा. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनका कद कितना ऊंचा है इसका जिक्र असीम छाबड़ा की लिखी किताब "IRRFAN KHAN M

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